श्री काली कल्ला गातौड़ मंदिर चित्तौड़गढ़

रविवार, 3 नवंबर 2024

श्री कल्लाजी का आह्वान

श्री कल्लाजी का आह्वान

माने दरशन दिजो जी के माने दरशन दिजो जी के ॥

कलजूग रा कल्याण रे कारण जनम लियो जगधाम
गौ रक्षक गातरोड़ रे लारे नित रहवे मेहमान
मारा रनेलिया सरदार, थाँतो जहर पियो हर बार
थाणी किण विद् करूँ जुहार, माने दरशन दिजो जी के ।

मृत्यु लोक मेवाड़ में राखी अपनी आन
मुगलाँरा छक्का छुड़वाया रण में लड्यो बे भान
मारा राठौड़ी सरदार थारी नित नित करूं पुकार
यूँ तो अलबैलो रणधीर माने दरशन दिजो जी के ।

शेष नाग रा लोक में शेष लियो अवतार
लक्ष्मण रो भाई बन बैठयो कमधजियो सरदार
मारो कमधजियो सरदार थाने विजवु बारम्बार
थारे जगदम्बा रो आधार माने दरशण दिजो जी के ॥

भूत पलित को दूर भगायो हनुमंत रो अवतार
निम्बाड़ा के गांव में प्रगटियो मूंदड़ाजी रे द्वार
कमधज थारो ही आधार, मॉणो करजे बेड़ा पार
माँणो हो जावे उद्धार, माने दरशन दिजो जी के ॥

थारी महिमा सुण-सुण ने, दूर सूँ आयो आज
किण विद थारी करू प्रार्थना -कुण सुणे आवाज
थारी लक्ष्मण करे पुकार, आवो रण बंका सरदार
माणें थारो ही आधार, माने दरशन दिजो जी के ॥

नित नित थारों हेलो गाउ, नित नित करूँ पुकार
क्यूँ थाँ मासूँ मेरा पडग्या माँने आवे घणो विचार
थाने मामाजी नी कार, थाने काकाजी नी कार
थाने मात पिता नी कार, माने दरशन दिजो जी के ॥

अन्नदाता ने अरजी

अन्नदाता ने अरजी

और आसरो छोड़ो आसरो लीनो आसरों कुँवर कल्लाजी को।
हे अनमोल कुल भूषण, थे दुःख कोटो दुःखिया को ॥ और ए.

तरह-तरह के रा मरीज़ आवे, मन में आसा लियाथा की।
मन चाहत फल दिखाता जावे, इच्छा पूरण हो वाकी ॥ और ए.

देश हित आया ताज-तोरण में,राजपूति शान रखावन में।
मंडप छोड़ चालता रण में, देश रो लाज आरक्षण ने॥ और ए.

रोगिया रा रोग काट ने, दुखिया रा दुखिया है।
है ! शरणगत प्रतिपाल मनोहर जी, जन-जन ने हर्षाया है।। और ए.

जानें, या बात सर्वजन संकट मोचन सुखकारी हो।
शिव-शक्ति राम परम लाडला, दुःखिया रा दुःख हारी हो।
शीश कट्या धड़ जो लड़ियो, कमधज नाम धरयो थकी ॥ और ए.

दान दितवार सदा दुःख कारण चित्तौड़गढ़ बिराजे है।
धीर वीर अजंता सुरमा, दुखिया रा दुःख वतावे है।। और ए.

दया हनुमंत बाया भैरू, संकट कटे संता को।
मन चाहा फल दिखाया जावे, साये भरी सो जाण थको।। और ए.

ना दान है, ना दक्षिणा ना जाणु पूजा थाकी।
खाली हाथ आयो थारे द्वारे, लज्जा राखो था माँ की।। और ए.

है ! प्रतिपाल महंत जी, शरणे शरणे आय री लाज राखो।
गुजा और पुमाप प्रभुवर, अणि ने पुजारी जानो ॥ और ए.

दान दक्षिणा और निछावर, अनी भिखारी ने जानो।
औ दाता दुख भजनवाला, हेलो सुनो ने थे माको॥ और ए.

ताता-भ्राता, बन्धु बांधव, हे कल्ला मु कनिने जानु।
माता पिता और गाथा का संबंध है दाता मू स्टेशन मानू।
चरणा माही मनोहर टेकने, दया री भिक्षा मू मांगू ॥ और ए.

चरणा रो चक्र दाता शरणे आया री लाज राखो।
है ! शरणगत प्रतिपाल कल्लाजी हेलो सुनजो थे माको।

' मारी' अरजिया यही है, दुःख काटो सदा दुःखिया को।